मुद्रा योजना से युवा बन रहे जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर: अनुराग सिंह ठाकुर

मुद्रा योजना से युवा बन रहे जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर: अनुराग सिंह ठाकुर
पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने पीएम मुद्रा योजना के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमियों, महिलाओं और वंचित वर्गों को बिना गारंटी ऋण देकर करोड़ों सपनों को उड़ान दी है और इसके कारण हमारे युवा जॉब सीकर की जगह जॉब क्रिएटर बन रहे हैं। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पीएम मुद्रा योजना ने 11 वर्षों में भारत में 58 करोड़ से अधिक मुद्रा लोन के अंतर्गत 40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि वितरित कर उद्यमियों के आर्थिक सशक्तिकरण की एक स्वर्णिम गाथा लिखी है। इस योजना ने छोटे उद्यमियों, महिलाओं और वंचित वर्गों को बिना गारंटी ऋण देकर करोड़ों सपनों को साकार किया है। मुद्रा योजना ने न केवल उद्यमिता को बढ़ावा दिया है, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाया है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना ने बड़े स्तर पर स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया है और अल्प समय में ही अनेक लोगों के जीवन में परिवर्तन लाया है। इसके परिणामस्वरूप युवा अब रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत की नींव जमीनी स्तर पर मजबूत हो रही है, जो नए भारत की सफलता की कहानी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मुद्रा योजना से देश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिली है और ऐसे लोगों को भी अपने व्यवसाय के लिए ऋण प्राप्त हुआ है, जिनकी पहले बैंकों तक पहुंच नहीं थी। इस योजना ने न केवल स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए हैं, बल्कि जॉब मल्टिप्लायर के रूप में कार्य करते हुए अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। मुद्रा योजना के लाभार्थियों में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है और लगभग 67 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए हैं। इनमें से 12.15 करोड़ से अधिक खाते नए उद्यमियों के हैं, जिन्हें 12 लाख करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है। उन्होंने आगे कहा कि मुद्रा योजना ने पारंपरिक ऋण बाधाओं को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लगभग 51 प्रतिशत मुद्रा खाते अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उद्यमियों के पास हैं, जिन्हें 49 प्रतिशत ऋण प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त 6.15 करोड़ अल्पसंख्यक लाभार्थियों को 3.50 लाख करोड़ रुपये के ऋण प्रदान किए गए हैं, जो हाशिए पर खड़े समुदायों को सशक्त बनाकर समावेशी विकास में योजना के योगदान को दर्शाता है।