जनता के सपनों पर बजट का वार; बड़सर की अनदेखी नहीं सहेंगे, सरकार दे जवाब: इन्द्रदत्त लखनपाल

बोले: अपना पूरा वेतन देने के लिए भी तैयार, बशर्ते सरकार विधयक निधि की ना करे कटौती

जनता के सपनों पर बजट का वार; बड़सर की अनदेखी नहीं सहेंगे, सरकार दे जवाब: इन्द्रदत्त लखनपाल
बड़सर विधानसभा क्षेत्र के विधायक इन्द्रदत्त लखनपाल ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे जनविरोधी, दिशाहीन और निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश की जनता के साथ अन्याय है, जिसमें न विकास की स्पष्ट दिशा दिखाई देती है और न ही जनकल्याण के लिए कोई ठोस दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। लखनपाल ने कहा कि बीते वर्षों में सरकार बड़ी घोषणाओं के माध्यम से अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर विकास कार्य ठप पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान केवल चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित है और बड़सर जैसे क्षेत्रों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बजट में बड़सर विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकताओं की उपेक्षा की गई है। ढटवाल क्षेत्र के कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर को सुदृढ़ करने, बिझड़ी के ताल स्टेडियम के जीर्णोद्धार, बड़सर में बस अड्डे के निर्माण तथा राजकीय महाविद्यालय बड़सर में एमए कक्षाएं शुरू करने जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों पर कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। इससे स्पष्ट है कि सरकार के पास क्षेत्रीय विकास की कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने विधायक क्षेत्र विकास निधि में की गई कटौती को जनविकास पर सीधा प्रहार बताया। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार आर्थिक संकट का हवाला देती है, वहीं दूसरी ओर विकास कार्यों के प्रमुख संसाधन को कम किया जा रहा है, जो दोहरी नीति को दर्शाता है। लखनपाल ने कहा कि वे अपना पूरा वेतन देने के लिए तैयार हैं, लेकिन क्षेत्र के विकास के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विधायक निधि में कटौती किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश वर्तमान में प्राकृतिक आपदाओं की गंभीर स्थिति से गुजर रहा है, जिसमें अनेक परिवार अपने घरों और जमीनों से वंचित हो चुके हैं। ऐसे समय में विधायक निधि राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण साधन हो सकती है, लेकिन सरकार इस संसाधन को कमजोर कर रही है। लखनपाल ने प्रश्न उठाया कि 31 मार्च 2026 तक आपदाग्रस्त क्षेत्रों में घरों की सुरक्षा हेतु डंगे लगाने के लिए दी गई छूट का क्या औचित्य है, जब प्रभावित लोगों के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध ही नहीं हैं। उन्होंने इसे दिखावटी निर्णय बताया, जिसका जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा। उन्होंने सरकार से पूछा कि आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ठोस योजना क्या है, बड़सर सहित उपेक्षित क्षेत्रों के विकास के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे तथा विधायक निधि में कटौती को वापस क्यों नहीं लिया जा रहा। इन्द्रदत्त लखनपाल ने मांग की कि उनका पूरा वेतन विधायक निधि में जोड़ा जाए और निधि में की गई कटौती को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके और आपदा प्रभावित लोगों को समय पर राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया और जनता के हितों की अनदेखी जारी रखी, तो इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा और आवश्यक होने पर जनआंदोलन का मार्ग भी अपनाया जाएगा।