भारतीय जनता पार्टी हमीरपुर के जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने कांग्रेस के पूर्व नेता प्रेम कौशल द्वारा भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह पर दिए गए बयान को गैर-जिम्मेदाराना और तथ्यों से परे बताते हुए कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। राकेश ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को बयान देने से पहले देश और प्रदेश की आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन करना चाहिए था, क्योंकि केवल राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए दिए जा रहे ऐसे बयान उनकी हताशा और निराशा को दर्शाते हैं।
राकेश ठाकुर ने कहा कि भारत की केंद्र सरकार लगभग 365 लाख करोड़ रुपये की विशाल अर्थव्यवस्था का संचालन करती है, इसलिए केंद्र सरकार द्वारा लिया गया ऋण राष्ट्रीय आर्थिक ढांचे में संतुलित रहता है। इसके विपरीत हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था वर्ष 2025-26 में लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपये के आसपास है, जबकि प्रदेश का कर्ज एक लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश पर ऋण का दबाव राष्ट्रीय स्तर की तुलना में कहीं अधिक गंभीर है।
उन्होंने कहा कि ऋण की तुलना केवल आंकड़ों से नहीं बल्कि उसके उपयोग से की जाती है। केंद्र सरकार राष्ट्रीय अवसंरचना निर्माण, रक्षा क्षेत्र, रेलवे विस्तार, पूंजीगत निवेश, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा आर्थिक मजबूती के लिए ऋण लेती है, जबकि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान सरकार का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान, पुराने ऋणों की अदायगी, झूठी गारंटियों की आंशिक पूर्ती, और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी मित्रों को खुश करने में खर्च हो रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत खर्च “कमिटेड एक्सपेंडिचर” में जा रहे हैं, जिसके कारण विकास कार्यों के लिए संसाधन लगभग समाप्त हो गए हैं।
राकेश ठाकुर ने कहा कि हालिया आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 की शुरुआत तक हिमाचल प्रदेश पर कुल ऋण देनदारी लगभग 1.01 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुकी है। सुक्खू सरकार ने पिछले तीन वर्षों में लगभग 35,555 करोड़ रुपये का ऋण लिया है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक की उधारी और भारी पुनर्भुगतान का बोझ प्रदेश पर पड़ा है। दूसरी ओर केंद्र सरकार की वर्ष 2027 के लिए प्रस्तावित लगभग 17.2 लाख करोड़ रुपये की उधारी के साथ उसकी राजस्व क्षमता और पुनर्भुगतान क्षमता भी अत्यंत मजबूत और व्यापक है।
राकेश ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को आर्थिक विषयों पर बोलने से पहले अपना इतिहास भी याद कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पिछली सरकारों के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था। पेट्रोलियम भुगतान व्यवस्था और विदेशी मुद्रा संकट के कारण देश गंभीर आर्थिक संकट में पहुंच गया था, जिसे बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने मजबूत आर्थिक नीतियों और वित्तीय अनुशासन से सुधारने का काम किया।
उन्होंने कहा कि देश कभी उस दौर को नहीं भूल सकता जब कांग्रेस शासनकाल में भारत को विदेशी मुद्रा संकट से उबरने के लिए अपना सोना तक गिरवी रखना पड़ा था। वर्ष 1991 के आर्थिक संकट के दौरान भारत को विदेशी बैंकों के पास स्वर्ण भंडार गिरवी रखकर ऋण लेना पड़ा था, क्योंकि तत्कालीन सरकारों की आर्थिक नीतियों ने देश को दिवालियापन जैसी स्थिति में पहुंचा दिया था।
राकेश ठाकुर ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुए हैं, भारत की वैश्विक आर्थिक साख बढ़ी है और दुनिया भारत को एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में देख रही है। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस शासन में देश का सोना गिरवी रखना पड़ा, वही कांग्रेस आज केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाने का प्रयास कर रही है, जो पूरी तरह हास्यास्पद है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की चापलूसी कर पार्टी में अपनी खोई हुई राजनीतिक पहचान वापस पाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार की आर्थिक विफलताओं, बढ़ते कर्ज और विकास कार्यों में आई ठहराव को भलीभांति समझ चुकी है।