हिमाचल में बीज अनुसंधान, किसान अधिकार और कृषि विज्ञान केंद्रों के सशक्तिकरण के लिए 18.58 करोड़ रुपये

अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा में उठाए किसानों के हितों से जुड़े मुद्दे

हिमाचल में बीज अनुसंधान, किसान अधिकार और कृषि विज्ञान केंद्रों के सशक्तिकरण के लिए 18.58 करोड़ रुपये
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने आज लोकसभा में पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम (पीपीवी एंड एफआर) के तहत किसानों के अधिकारों, पारंपरिक बीजों के संरक्षण, बीज अनुसंधान तथा हिमाचल प्रदेश में कृषि विज्ञान केंद्रों की कार्यप्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों के लिए चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों, पौध किस्मों के पंजीकरण, बीज अनुसंधान, कृषि विज्ञान केंद्रों की गतिविधियों तथा इन योजनाओं के लिए उपलब्ध कराए गए वित्तीय प्रावधानों की विस्तृत जानकारी मांगी। सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि पीपीवी एंड एफआर प्राधिकरण ने पालमपुर में अपनी शाखा स्थापित की है। पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रदेशभर में किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम, मेले, प्रदर्शनी तथा पौध किस्मों के पंजीकरण से संबंधित अनेक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस अवधि में हिमाचल प्रदेश की 31 पौध एवं बीज किस्मों का पंजीकरण भी किया गया है। सरकार ने यह भी जानकारी दी कि सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर स्थित आईसीएआर-एआईसीआरपी (सीड्स) केंद्र ने पिछले तीन वर्षों में 1,957.20 क्विंटल ब्रीडर बीज तथा 17,512 क्विंटल गुणवत्तायुक्त बीज का उत्पादन किया। वहीं प्रदेश के 13 कृषि विज्ञान केंद्रों ने 23,960 खेत प्रदर्शन आयोजित किए, लगभग 93 हजार किसानों एवं अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण प्रदान किया तथा 5,567.35 क्विंटल गुणवत्तायुक्त बीज और 18.27 लाख बागवानी पौध तैयार किए। सरकार ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश में पीपीवी एंड एफआर संबंधी गतिविधियों के लिए 2.94 करोड़ रुपये, आईसीएआर के बीज अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए 5.31 करोड़ रुपये तथा कृषि विज्ञान केंद्रों की गतिविधियों के लिए 10.33 करोड़ रुपये जारी किए गए। इस प्रकार किसानों के अधिकारों की सुरक्षा, बीज अनुसंधान और कृषि विज्ञान केंद्रों को सशक्त बनाने के लिए कुल 18.58 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार ने यह भी बताया कि किसानों के अधिकारों की रक्षा, पारंपरिक फसली किस्मों के संरक्षण, जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने तथा पर्वतीय कृषि को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगातार कार्य कर रही है। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध कृषि जैव विविधता, पारंपरिक बीजों की विरासत और किसानों के अधिकारों का संरक्षण समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बीज अनुसंधान, आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार तथा कृषि विज्ञान केंद्रों को और अधिक सशक्त बनाने से किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश की कृषि को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा और कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर एवं अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।