भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹5 की वृद्धि आम आदमी की जेब पर सीधा हमला है, जिससे जनता पर सालाना हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले भी दो चरणों में ₹10 से अधिक वैट लगाया गया था और अब ₹5 का सेस लगाकर कुल ₹15 प्रति लीटर का अतिरिक्त भार डाल दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में पेट्रोल की कीमत ₹100 के पार और डीजल की कीमत ₹90 से अधिक पहुंच गई है।
राकेश ठाकुर ने कहा कि इस बढ़ोतरी के बाद हिमाचल प्रदेश में ईंधन की कीमतें पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से भी अधिक हो जाएंगी, जिससे सीमावर्ती जिलों के व्यापार और परिवहन क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक वाहनों पर एंट्री टैक्स बढ़ाकर सरकार ने माल ढुलाई महंगी कर दी है, जिसका सीधा असर फल, सब्जी और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में पहली बार सितंबर 2024 में लगभग 2 लाख कर्मचारियों और 1.5 लाख पेंशनभोगियों को समय पर वेतन और पेंशन नहीं मिल पाई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में प्रदेश पर ₹47,906 करोड़ का कर्ज था, जो कांग्रेस सरकार के तीन साल के कार्यकाल में बढ़कर ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो गया है और अनुमान है कि अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत तक यह ₹1.40 लाख करोड़ को पार कर जाएगा।
राकेश ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी की खटाखट गारंटियों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। 18 से 60 वर्ष की सभी महिलाओं को ₹1500 देने का वादा केवल कागजों और सीमित वर्गों तक सिमट कर रह गया है। 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा भी आर्थिक तंगी की भेंट चढ़ गया है और टैक्स देने वालों के लिए बिजली सब्सिडी समाप्त कर दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को 5 लाख नौकरियां देने के बजाय सरकार ने संस्थानों को बंद करने और भर्तियों को लटकाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रही है और जिस सरकार के पास न तो स्पष्ट दृष्टि है और न ही जनहित की नीयत, उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।