संवैधानिक सुधारों पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में शामिल हुए अनुराग ठाकुर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से की चर्चा

संवैधानिक सुधारों पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में शामिल हुए अनुराग ठाकुर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से की चर्चा
हमीरपुर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने आज संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 तथा संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025 की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्ययन दौरे में भाग लिया। दिल्ली में आयोजित समिति की परामर्श बैठकों के दौरान अनुराग ठाकुर ने समिति के अन्य सदस्यों के साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात कर प्रस्तावित विधायी सुधारों पर विस्तृत चर्चा की। इस संवाद के माध्यम से लोकतांत्रिक जवाबदेही, संवैधानिक शासन व्यवस्था और संस्थागत पारदर्शिता को सुदृढ़ बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। अध्ययन दौरे के दौरान समिति ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार, गृह मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय तथा विभिन्न नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी व्यापक विचार-विमर्श किया। इन बैठकों के माध्यम से नीति निर्माताओं, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों के दृष्टिकोण प्राप्त किए गए, जिससे प्रस्तावित संवैधानिक एवं प्रशासनिक सुधारों के विभिन्न आयामों को समझने में सहायता मिली। अनुराग ठाकुर ने कहा कि विचाराधीन महत्वपूर्ण प्रावधानों में यह व्यवस्था शामिल है कि यदि कोई मंत्री, मुख्यमंत्री अथवा प्रधानमंत्री किसी ऐसे अपराध के मामले में, जिसमें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो, लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे अपना पद छोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव इस मूल सिद्धांत पर आधारित है कि सार्वजनिक पद के साथ सर्वोच्च स्तर की जवाबदेही जुड़ी होनी चाहिए तथा कानून से ऊपर कोई भी व्यक्ति नहीं हो सकता, चाहे उसका पद कितना भी ऊंचा क्यों न हो। यह सुधार लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को और मजबूत करने तथा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि देश ने अतीत में ऐसे उदाहरण भी देखे हैं, जब संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति न्यायिक हिरासत में रहने के बावजूद कार्यपालिका संबंधी अधिकारों का उपयोग करते रहे, जिससे सुशासन, जवाबदेही और संवैधानिक मर्यादाओं को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन ऐसे संस्थागत अस्पष्टताओं को दूर करने और शासन व्यवस्था को संविधान की मूल भावना के अनुरूप बनाए रखने का प्रयास है। दिल्ली में पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के प्रयासों की सराहना करते हुए अनुराग ठाकुर ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को और सशक्त बनाने तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ, संवेदनशील और जन-केंद्रित सुशासन के विजन को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक विधायी सुधारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।