गोबिंद सागर जलाशय से 100 एमसीएम गाद हटाने की दिशा में बड़ी पहल, भाखड़ा बांध की क्षमता बढ़ाने के लिए शुरू हुई डी-सिल्टेशन परियोजना

अनुराग सिंह ठाकुर के प्रश्न पर लोकसभा में केंद्र का जवाब, बीबीएमबी ने 10 वर्षीय योजना शुरू की; जीएसआई करेगा भूस्खलन व गाद स्रोतों का वैज्ञानिक अध्ययन

गोबिंद सागर जलाशय से 100 एमसीएम गाद हटाने की दिशा में बड़ी पहल, भाखड़ा बांध की क्षमता बढ़ाने के लिए शुरू हुई डी-सिल्टेशन परियोजना
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा लोकसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने बताया है कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने हिमाचल प्रदेश स्थित भाखड़ा बांध के गोबिंद सागर जलाशय में डी-सिल्टेशन की पायलट परियोजनाएं शुरू कर दी हैं। इन परियोजनाओं के तहत बिलासपुर के लुहणू ग्राउंड तथा सीर खड्ड क्षेत्र में अगले 10 वर्षों के दौरान लगभग 100 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) गाद हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे जलाशय की संचालन क्षमता और दीर्घकालिक उपयोगिता में उल्लेखनीय सुधार होगा। केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने लोकसभा में दिए उत्तर में बताया कि इन परियोजनाओं को राजस्व सृजन मॉडल के तहत प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। चयनित एजेंसी को निकाली गई गाद का व्यावसायिक उपयोग करने की अनुमति होगी, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार को लागू रॉयल्टी, कर, शुल्क और सेस का भुगतान किया जाएगा। अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा परियोजना में राज्य सरकार की ओर से उत्पन्न बाधाओं के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 3 जून 2026 को जारी कारण बताओ नोटिस का बीबीएमबी ने 9 जून 2026 को उत्तर दे दिया था। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना में किसी प्रकार की देरी राज्य सरकार की आपत्तियों के कारण नहीं हुई है। मार्च और अप्रैल 2026 में जारी प्रारंभिक निविदाएं केवल इसलिए निरस्त करनी पड़ीं क्योंकि बोलीदाताओं ने निर्धारित पात्रता मानदंड पूरे नहीं किए थे। इसके बाद सीर खड्ड की निविदा में आवश्यक संशोधन कर उसे पुनः जारी किया गया तथा 23 जुलाई 2026 को तीन कंपनियों की बोलियां खोली गईं। अनुबंध आवंटन और आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त होने के बाद डी-सिल्टेशन कार्य शुरू किया जाएगा। विद्युत मंत्रालय ने यह भी बताया कि भाखड़ा और पोंग बांधों के लिए अलग से कोई अवसाद प्रबंधन नीति तैयार नहीं की गई है, बल्कि बीबीएमबी राष्ट्रीय अवसाद प्रबंधन रूपरेखा (नेशनल फ्रेमवर्क फॉर सेडिमेंट मैनेजमेंट) के अनुरूप कार्य कर रहा है। इसके साथ ही बीबीएमबी, जल शक्ति मंत्रालय की विश्व बैंक समर्थित डैम रिहैबिलिटेशन एंड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (डीआरआईपी) फेज-2 एवं फेज-3 का भी हिस्सा है। मंत्रालय के अनुसार, डीआरआईपी के अंतर्गत भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) को भाखड़ा बांध से कोल बांध तक के जलग्रहण क्षेत्र में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक मानचित्रण तथा गाद उत्पन्न करने वाले प्रमुख स्थलों की पहचान का कार्य सौंपा गया है। इससे भविष्य में जलाशयों में गाद जमाव को नियंत्रित करने और दीर्घकालिक जल प्रबंधन रणनीति को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।