संगीत केवल हार-जीत नहीं, मंच पर आने का साहस ही सबसे बड़ी जीत: सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. सतीश सोनी

एनएससीबीएम हमीरपुर में एचपीयू अंतर-महाविद्यालय युवा उत्सव ग्रुप-II (संगीत) के तीसरे दिन पाश्चात्य संगीत की प्रस्तुतियों से गूंजा परिसर

संगीत केवल हार-जीत नहीं, मंच पर आने का साहस ही सबसे बड़ी जीत: सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. सतीश सोनी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेमोरियल राजकीय महाविद्यालय (एनएससीबीएम), हमीरपुर में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय एचपीयू अंतर-महाविद्यालय युवा उत्सव ग्रुप-II (संगीत) के तीसरे दिन पाश्चात्य गायन (एकल) एवं पाश्चात्य वाद्य संगीत (एकल) प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। युवा प्रतिभाओं की शानदार प्रस्तुतियों से महाविद्यालय परिसर संगीतमय रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. सतीश सोनी रहे। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता सिंह ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। अपने संबोधन में सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. सतीश सोनी ने बताया कि वे कभी इसी महाविद्यालय के प्राचार्य रहे हैं और आज उसी संस्थान में मुख्य अतिथि के रूप में आना उनके लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय का प्रदेश के 142 महाविद्यालयों में प्रथम स्थान पर रहना पूरे संस्थान के लिए गौरव की बात है, जिसके लिए उन्होंने सभी को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने बताया कि यह सफलता किसी एक की नहीं, बल्कि शिक्षकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों और विद्यार्थियों की संयुक्त मेहनत और समर्पण का फल है। महाविद्यालय से अपने गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाते हुए डॉ. सोनी ने विद्यार्थियों के प्रोत्साहन हेतु 10,000 रुपये की सहयोग राशि देने की घोषणा की। डॉ. सोनी ने बताया कि उन्हें इस महाविद्यालय में प्राचार्य के रूप में 10 महीने सेवा का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि यह समय भले ही कम था, लेकिन इससे पहले वे यहां 20 वर्ष तक सेवाएं दे चुके थे, इसलिए संस्थान की हर जरूरत से भली-भांति परिचित थे। उन्होंने बताया कि अपने कार्यकाल में जो भी कमियां उन्हें नजर आईं, उन्हें दूर करने का उन्होंने भरसक प्रयास किया। उन्होंने बताया कि शेष कार्यों को वर्तमान प्राचार्या डॉ. संगीता सिंह निश्चित रूप से पूरा करेंगी। उन्होंने बताया कि प्राचार्या पूरे समर्पण से कार्य करती हैं और सभी को साथ लेकर निर्णय लेती हैं। युवा उत्सव जैसे आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सोनी ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों से महाविद्यालय के वातावरण में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। उन्होंने बताया कि इनसे प्रदेशभर से आए विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने, अनुशासन में रहने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भरपूर अवसर मिलता है। उन्होंने बताया कि ऐसे प्रतिभागियों को अपनी कमियों को पहचानकर उन पर काम करना चाहिए, क्योंकि हार से सीखने वाला ही आगे चलकर सफलता प्राप्त करता है। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता सिंह ने बताया कि युवा उत्सव विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने बताया कि डॉ. जगमोहन शर्मा, डॉ. अशोक कुमार शर्मा, डॉ. सुरत ठाकुर एवं श्री अमृत लाल शर्मा निर्णायक मंडल की भूमिका निभा रहे हैं। आयोजन सचिव डॉ. पूनम शर्मा ने बताया कि उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर को भारतीय समूह गीत एवं पाश्चात्य समूह गीत तथा 17 अक्टूबर को लोक ऑर्केस्ट्रा प्रतियोगिता के साथ पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर के लगभग 42 महाविद्यालयों के करीब 500 विद्यार्थी इस सांस्कृतिक महाकुंभ में भाग ले रहे हैं।