लोकसभा में अनुराग ठाकुर ने उठाया पौंग और भाखड़ा बांध विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा

जल शक्ति मंत्रालय ने अनुराग ठाकुर के सवाल पर भाखड़ा-पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास और भूमि आवंटन की स्थिति स्पष्ट की

लोकसभा में अनुराग ठाकुर ने उठाया पौंग और भाखड़ा बांध विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने 13 अगस्त को लोकसभा में भाखड़ा और पौंग बांध परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए परिवारों के लंबित पुनर्वास का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पात्र विस्थापित परिवारों, भूमि आवंटन, निरस्त किए गए दावों तथा राज्यों के बीच लंबित मामलों के समाधान के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की कार्यप्रणाली सहित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी। अनुराग ठाकुर के सवाल के जवाब में जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने भाखड़ा बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों की पुनर्वास स्थिति की जानकारी लोकसभा में दी। मंत्रालय के अनुसार भाखड़ा बांध के निर्माण से 7,209 परिवार प्रभावित हुए थे। वर्ष 1959 की पुनर्वास नीति के तहत इन परिवारों को नकद मुआवजा अथवा हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद और हिसार जिलों में वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराई गई थी। मंत्रालय ने बताया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) ने अपनी 240वीं बैठक में अपने स्तर पर पुनर्वास संबंधी प्रक्रिया को बंद कर दिया है और बोर्ड के अनुसार अब कोई लंबित देनदारी शेष नहीं है। शेष स्थानीय एवं दैनिक प्रकृति के मामलों का निपटारा फतेहाबाद में संबंधित स्थानीय प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। पौंग बांध विस्थापितों के संबंध में सरकार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सरकारों के बीच आपसी सहमति से पात्र विस्थापितों की कुल संख्या 16,100 है। हिमाचल प्रदेश से 14,737 पात्रता प्रमाणपत्र प्राप्त हुए हैं तथा प्रारंभिक तौर पर 12,971 विस्थापितों को भूमि आवंटित की गई थी। हालांकि राजस्थान कॉलोनाइजेशन नियम, 1972 के प्रावधानों का अनुपालन न होने के कारण 1,880 मामलों में भूमि आवंटन रद्द किया गया। इसके बाद वर्तमान में 11,091 भूमि आवंटन प्रभावी हैं। पौंग बांध विस्थापितों से जुड़े भूमि विवादों और पुनर्वास संबंधी मामलों के समाधान के लिए राजस्थान सरकार के अधीन उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) और स्थायी समिति कार्य कर रही हैं। मंत्रालय के अनुसार पिछले पांच वर्षों में HPC की पांच बैठकें आयोजित की गईं, जिनके परिणामस्वरूप 594 अतिरिक्त विस्थापितों को भूमि आवंटित की गई। विस्थापित परिवारों को राहत प्रदान करने की दिशा में सरकार ने आवंटित भूमि पर कब्जा लेने की समयसीमा भी 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन कर दी है। साथ ही, आवंटित भूमि पर निवास कर रहे परिवारों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने की सुविधा भी उपलब्ध है। अनुराग ठाकुर द्वारा लोकसभा में इस महत्वपूर्ण विषय को उठाए जाने से भाखड़ा और पौंग बांध विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े लंबित मामलों तथा भूमि आवंटन की प्रक्रिया की स्थिति संसद के समक्ष स्पष्ट हुई है।