‘एससी-एसटी अत्याचार के मामलों की जांच एवं अभियोजन में न हो विलंब’
‘एससी-एसटी अत्याचार के मामलों की जांच एवं अभियोजन में न हो विलंब’
एडीसी ने की कल्याण विभाग की 6 जिला स्तरीय समितियों की बैठकों की अध्यक्षता
नशे के कारोबार में संलिप्त लोगों पर शिकंजा कसने के लिए फील्ड में औचक निरीक्षण करें अधिकारी
एडीसी अभिषेक गर्ग ने शनिवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं, अभियानों तथा अधिनियमों से संबंधित छह अलग-अलग जिला स्तरीय समितियों की बैठक की अध्यक्षता की।
एससी एवं एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की समीक्षा करते हुए एडीसी ने पुलिस और अभियोजन विभाग के अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों की जांच और अभियोजन में विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया इस वर्ष अभी तक जिला में अधिनियम के तहत 18 एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनमें से 5 मामलों के चालान पेश कर दिए गए हैं और 12 मामलों में पुलिस की जांच जारी है। विभिन्न अदालतों में लगभग 28 मामले विचाराधीन हैं। जबकि, 8 मामलों की कैंसलेशन रिपोर्ट तैयार की गई है। 27 पीड़ितों को राहत राशि प्रदान की गई है। एडीसी ने उच्च न्यायालय में वर्षों से लंबित मामलों की फॉलोअप रिपोर्ट भी तलब की।
नशा मुक्त भारत अभियान 2.0 के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय समिति की बैठक में एडीसी ने कहा कि जिला में 100 नशा मुक्ति मित्रों को प्रशिक्षण दिया गया है। नशे की अधिकता वाली जिला की 14 ग्राम पंचायतों को रैड ग्राम पंचायतें घोषित करके इनमें नशा विरोधी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा, पंचायतीराज और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को फील्ड में औचक निरीक्षण करने तथा इनकी रिपोर्ट नियमित रूप से जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय को प्रेषित करने के निर्देश दिए। सभी विभाग नशा विरोधी एवं जागरुकता गतिविधियों की रिपोर्ट निर्धारित फॉरमेट भेजें और इसके लिए अलग से नोडल अधिकारी नियुक्त करें। एडीसी ने बताया कि नशा मुक्त भारत अभियान के तहत एक क्यूआर कोड भी जारी किया गया है। कोई भी व्यक्ति इसे स्कैन करके नशा मुक्ति मित्र बन सकता है।
राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के अंतर्गत गठित स्थानीय समिति की बैठक में एडीसी ने बताया कि मानसिक विकलांगता, ऑटिज्म, सेरीब्रल पाल्सी और बहु-विकलांगता से ग्रस्त 18 वर्ष या इससे अधिक आयु के लोगों के लिए कानूनी संरक्षकों की नियुक्ति आवश्यक होती है। जिला में अभी तक 211 ऐसे दिव्यांगजनों के अभिभावकों को कानूनी अभिभावक प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। समिति ने 2 नए मामलों में कानूनी संरक्षकों की नियुक्ति को भी मंजूरी प्रदान की।
जिला दिव्यांगता समिति की बैठक में एडीसी ने सभी सरकारी भवनों, सार्वजनिक स्थलों, परिवहन सेवाओं, अस्पतालों, कार्यालयों और शौचालयों इत्यादि में दिव्यांगों के लिए निर्धारित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए।
हाथ से मैला उठाने वाले सफाई कर्मचारियों के नियोजन प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम-2013 के अंतर्गत गठित जिला सतर्कता समिति की बैठक में एडीसी ने कहा कि सभी सफाई कर्मचारियों के पास आवश्यक उपकरण एवं सुरक्षा किट होनी चाहिए तथा उनके स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच होनी चाहिए।
एडीसी ने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्रीय कार्यक्रम की समीक्षा भी की तथा सभी विभागों को इस वर्ग के लोगों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने के निर्देश दिए।
उक्त सभी समितियों की बैठकों में जिला कल्याण अधिकारी चमन लाल शर्मा ने विभिन्न योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। बैठक में एसपी बलवीर सिंह, जिला न्यायवादी संदीप अग्निहोत्री, नगर निगम के आयुक्त राकेश शर्मा, संबंधित विभागों के अधिकारी तथा उक्त समितियों के गैर सरकारी सदस्य भी उपस्थित थे।