एक आम श्रमिक के लिए अपने परिवार के पालन-पोषण, मकान निर्माण और बच्चों की सही शिक्षा के बाद बच्चों की धूमधाम से शादी करने का वक्त आता है तो उसे शादी के भारी-भरकम खर्चे की काफी चिंता होती है। परिवार के पालन-पोषण से लेकर, मकान निर्माण, बच्चों की शिक्षा और उन्हें सेटल करने तक उसका काफी खर्चा हो जाता है और इसके बाद उसी श्रमिक के सिर पर बच्चों की शादी की बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी आ जाती है। कई बार तो वह बच्चों की शादी की वजह से कर्जे में भी डूब जाता है।
जिला हमीरपुर की तहसील टौणी देवी के बराड़ा क्षेत्र के गांव लडयोह के एक श्रमिक राकेश कुमार भी इसी स्थिति से गुजर रहे थे। सतलुज जल विद्युत निगम की धौलासिद्ध परियोजना में श्रमिक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने अपने बेटे और बेटी को अच्छी शिक्षा दी तथा छोटा सा मकान भी बना लिया। इसके बाद उन्होंने जैसे-तैसे दोनों बच्चों की शादी भी धूमधाम से कर दी। लेकिन, बेटे अमित की शादी में उनका काफी ज्यादा पैसा खर्च हो गया और उन पर कर्जे का बोझ भी पड़ गया। ऐसी परिस्थितियों में राकेश कुमार और उनकी धर्मपत्नी रीना को काफी चिंता हो रही थी। पति-पत्नी दोनों ही इस चिंता में रहते थे कि आखिर, इस कर्जे से उन्हें कब मुक्ति मिलेगी।
राकेश कुमार ने हिमाचल प्रदेश भवन निर्माण एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में श्रमिक के रूप में अपना पंजीकरण करवा रखा था और उन्हें उम्मीद थी कि विवाह अनुदान योजना में उनका नंबर जरूर आ जाएगा तथा उन्हें बेटे की शादी पर इस योजना के तहत 51 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा। उन्होंने इसके लिए आवेदन कर दिया और कुछ समय बाद उन्हें विवाह अनुदान योजना के तहत 51 हजार रुपये की राशि मिल भी गई।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए राकेश कुमार ने बताया कि बोर्ड से प्राप्त धनराशि से उन्होंने अपना कर्जा चुका दिया और अब वह अपने पूरे परिवार के साथ प्रसन्नतापूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। राकेश कुमार की धर्मपत्नी रीना और बहू शबनम कुमारी का भी यही कहना है कि भवन निर्माण एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की योजना उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा सहारा साबित हुई है।
उधर, बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह ठाकुर ने बताया कि यह बोर्ड अपनी 13 कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों को मकान निर्माण, चिकित्सा सहायता, बच्चे के जन्म से लेकर, शिक्षा और विवाह के लिए आर्थिक सहायता, पेंशन, दिव्यांगता पेंशन, श्रमिक की मृत्यु पर आर्थिक मदद और कई अन्य सुविधाओं के अलावा श्रमिक के अपने विवाह के लिए भी वित्तीय मदद प्रदान करता है। चाहे श्रमिक के बच्चे का जन्म हो या उसकी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण या विवाह, मकान निर्माण हो या बीमारी का इलाज, अथवा जीवन में कोई अन्य आपात परिस्थिति, इन सभी कार्यों के लिए बोर्ड भरपूर आर्थिक मदद प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जिला में बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कामगारों को कुल 7.47 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। बोर्ड ने इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश भर के कामगारों के लिए 211.47 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट मंजूर किया है, जिससे हजारों पात्र एवं जरुरतमंद कामगार लाभान्वित होंगे।