सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने शुक्रवार को जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, नोएडा के 20वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दीक्षांत भाषण दिया। समारोह का शुभारंभ संस्थान के चेयरमैन शरद जयपुरिया ने किया। इस अवसर पर वाइस चेयरमैन श्रीवत्स जयपुरिया तथा निदेशक डॉ. प्रभात पंकज सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अनुराग ठाकुर ने शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान की 80 वर्षों की गौरवशाली यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि एएसीएसबी मान्यता प्राप्त करने वाला यह देश के अग्रणी संस्थानों में शामिल है। उन्होंने इसे भारत का पहला एआई-नेटिव बिजनेस स्कूल बताते हुए कहा कि यहां से निकलने वाली नई पीढ़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्रभावित होने के बजाय उसका नेतृत्व करने की क्षमता रखती है।
अपने संबोधन में अनुराग सिंह ठाकुर ने पिछले 12 वर्षों में भारत के व्यापक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए इसे रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म की यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि जीएसटी संग्रह अप्रैल 2026 में रिकॉर्ड 2.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा है तथा दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के माध्यम से 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वसूली संभव हुई है। उन्होंने कहा कि भारत आज फ्रैजाइल फाइव से निकलकर विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। देश में प्रतिमाह 1300 करोड़ से अधिक यूपीआई लेनदेन हो रहे हैं और चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है। उन्होंने नीति आयोग के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2013-14 से 2022-23 के बीच लगभग 24.82 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
प्रबंधन के स्नातकों को संबोधित करते हुए अनुराग ठाकुर ने संस्थान की स्टूडेंट फर्स्ट सोच को नेशन फर्स्ट दृष्टिकोण से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से भारत को प्राथमिकता देने तथा नौकरी तलाशने वालों के बजाय रोजगार सृजित करने वाले बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया और पीएलआई जैसी योजनाएं युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही हैं। उन्होंने कॉरपोरेट जगत में नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वर्ष 2026 के भारत में विश्वास और चरित्र सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी तकनीकी और एआई आधारित शिक्षा का उपयोग गांवों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए करने का आग्रह किया, ताकि वे केवल सफल व्यवसाय ही नहीं बल्कि एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण में भी योगदान दे सकें।
अपने संबोधन के समापन में अनुराग ठाकुर ने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में निरंतर सीखने की भावना और विनम्रता ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि जयपुरिया संस्थान के लगभग 50 प्रतिशत पूर्व छात्र दस वर्षों के भीतर जनरल मैनेजर या समकक्ष नेतृत्व पदों तक पहुंचते हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि करियर निरंतर विकास की यात्रा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 के भारत का नेतृत्व वही लोग करेंगे जो जिज्ञासु बने रहेंगे, नई चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को ढालेंगे और निरंतर सीखते रहेंगे। उन्होंने वर्ष 2026 के स्नातकों से ईमानदारी के साथ नेतृत्व करने, भारत के लिए बड़े सपने देखने और अगले 21 वर्षों में देश के भविष्य को आकार देने की जिम्मेदारी को अवसर के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया।